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कृष्ण की मौत कैसे हुई ! Krishna ki mout kaise hui

Krishna ki mout kaise hui
Krishna ki mout kaise hui

श्री कृष्ण की मौत कैसे हुई कब हुई और कहा हुए
आज के ईस पोस्ट में हम आपके इन्हीं सवालों के जवाब देंगे


श्री कृष्ण की मौत :- 
श्री कृष्ण की मौत को समझने से पहले हमे त्रेता युग में जाना जरूरी है ओर त्रेता युग की उस कथा को जानना जरूरी है जिसका सीधा संबंध श्री कृष्ण की मृत्यु से है 

कौनसी कथा है ? चलिए आपको बता देते है
जब श्री राम को वनवास हो गया था और सीता का हरण हो गया था तो सिता की खोज में श्री राम ऋषिमुक पर्वत पर रहने वाले सुग्रीव से मित्रता करने के बाद श्री राम ने बाली को छुपकर के मारा था 

जब बाली का आखिर वक्त होता है उस वक्त श्री राम उन्हें वरदान देने के लिए कहते है 

बाली ने एक वरदान मांगा कि प्रभु जिस तरह आपने मेरे प्राण लिए है उसी तरह में आपके प्राण लू क्योंकि मेरी रण लालसा पूरी नहीं हुई 
तब श्री राम ने बाली से कहा कि बाली द्वापर युग में तुम्हारा ये वरदान पूर्ण हो जाएगा 


Krishna death story
Krishna death story

द्वापर युग :- 

जब श्री कृष्ण महाभारत युद्ध के 36 साल बाद प्रभाष नदी के किनारे तीर्थ के लिए गए तब वो नदी में स्नान करने के बाद एक पेड़ के नीचे आराम करने लगे

तभी वहा एक जिरू नाम का शिकार आ गया जीरू को लगा कि पेड़ के नीचे कोई हिरण है ओर उसने बाण चला दिया वह बान श्री कृष्ण को लगा ओर इससे श्री कृष्ण की मृत्यु हो गई

जीरु शिकारी कोन था :
ज़ीरू शिकार पिछले जन्म में बाली था जिसे भगवान श्री राम ने मारा था और वरदान दिया था कि अपने अगले जन्म में तुम मुझे मारोगे

तो दोस्तो ये थी श्री कृष्ण की मौत कैसे हुई इस सवाल से जुड़ी कुछ खास बातें 


 आपको ये पोस्ट कैसी लगी जरूर बताए 
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पोस्ट पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद
मिलते है किसी और पोस्ट में तब तक के लिए नमस्कार

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 तो दोस्तो आज मे हम आपके इन्हीं सवालों के जवाब इस पोस्ट में दूंगा 


मंदोदरी कोन थी :- पुरानी कथाओं के अनुसार बताते है की मंदोदरी एक मेंढकी थी एक समय बात है ! 

सप्तऋषि खीर बना रहे थे उस खीर में एक सर्प गिर गया ये सब मंदोदरी ने देख लिया


 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


ऋषियों ने समझ लिया कि इस मेंढकी  ने हमे बचाने के लिए अपने प्राण त्याग दिए उन्होंने मंदोदरी को वापस जीवन दान दिया और एक कन्या का रूप दिया तब से कहा जाता हैं की मंदोदरी सप्तऋषियों की संतान थी


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