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History of Nawalgarh ! Best Scenic Spots, Hotel in Nawalgarh

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Nawalgarh



Where is nawalgarh located

The city of Nawalgarh is about 30 kilometers and 39 kilometers from the headquarters of Sikar and Jhunjhunu. It is directly connected by road to Jaipur, Delhi, Ajmer, Kota and Bikaner. Jaipur is about 145 kilometers from here, while the capital Delhi is located at a distance of about 250 kilometers. Nawalgarh is connected by broad gauge rail line on Jaipur-Luharu road. Heritage on Wheels, it is a luxury tourist train, which provides an opportunity to see Nawalgarh and Shekhawati closely.


When was Nawalgarh established

Nawalgarh was founded by Thakur Nawal Singh Ji Bahadur (Shekhawat) in 1737 AD. According to the experts of Shekhawati's written unwritten history, Shekhawati Rajputs dominated the Shekhawati region from the fifteenth century (1443) to the middle of the eighteenth century i.e. 1750. Then their empire was as far as Sikarwati and Jhunjhunwati. The area dominated by the Shekhawat Rajputs is called Shekhawati, but due to the uniformity in language, dialect, living, food, dress language and sociocultural methods, Churu district also came to be considered a part of Shekhawati.


History of Nawalgarh in English

In the role of historian Surjan Singh Shekhawat's book 'Brief History of Nawalgarh', it is written that Rajput Rao Shekha ruled here from 1433 to 1488. In the same book, it is written that Thakur Todarmal, the king of Udaipurwati (Shekhawati), instead of appointing one of his sons as his successor, implemented Bhai Bunt. As a result, the partition was so rapid that even a village was divided into four to five shekhawats. The same mistake was repeated in Jhunjhunu State. This practice made the Shekhawats from the king to Bhaumiya (owner of a land).

The then king of Jhunjhunu was Shardul Singh, divided into the lands of five sons - Zorawar Singh, Kishan Singh, Akha Singh, Naval Singh and Keshar Singh. Nawalgarh of Nawal Singh is a model of the same Bhai Bunt system. Nawal Singh was the king of Nawalgarh and Mandawa provinces.


Best Scenic Spots in Nawalgarh


Nawalgarh Fort, Roop Niwas Palace, Sheeshmahal, Poddar College Tower, Laxmi Narasimha Temple and Gopinathji Temple Ramdev Ji's Temple Kamal Morarka Haveli Museum, Podar Haveli Museum are the attractions. Nawalgarh also has a state-of-the-art science park and Sadhguru Kabir Satsang Ashram. Where the tourists keep coming throughout the year

Beautiful fresco paintings made in the Rajput forts and havelis of Shekhawati are famous all over the world. Due to this, Shekhawati zone is called the open art gallery of Rajasthan. During the years 1830 to 1930, merchants built havelis with beautiful and attractive paintings to prove their success and prosperity. Among them are Bhagat Ki Haveli, Chhoti Haveli, Parasurampuria Haveli, Chhauchria Haveli, Seksaria, Morarka Ki Haveli and Poddar Haveli.


Best hotel and guest houses in nawalgarh

Great hotels and guest houses are available for stay in Nawalgarh. Among them are Rupnivas Palace, Hotel Apani Dhani, Hotel City Palace, Naval Hotel, Teej Hotel etc. Shekhawati is considered a pioneer in the field of education. Pilani, Laxmangarh and Nawalgarh have worked to shape the educational landscape. The first college of Rajasthan, Seth Gianiram Bansidhar Podar College, Nawalgarh was established here in 1921. Mahatma Gandhi himself was the trustee of this college

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