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History of Jodhpur in english

History of Jodhpur
History of jodhpur

History of jodhpur


Establishment of Jodhpur :-

Jodhpur was founded by a Rajput Rao Jodha (1438-89 AD) in 1459 and was the capital of the erstwhile Jodhpur princely state. The new capital was settled here, removed from Mandore. In order to secure the new capital, a fort was also built on the Chiditunk hill, which is still famous as the fort of Jodhpur.

History of jodhpur :- 
Jodhpur became the possession of the Mughals in 1565 AD. Rao Chandrasen of Jodhpur state met Akbar in 1570 AD but Akbar considered his rival brother Mota Raja Uday Singh as the ruler of Jodhpur state. Chandrasen returned disappointed and protested throughout his life. After the invasion of Mughal Emperor Akbar in 1961, it accepted the dominance of the Mughals.

In 1679, the Mughal emperor Aurangzeb attacked and looted Marwar, forcing the inhabitants to accept Islam, but the princely states of Jodhpur, Jaipur and Udaipur formed an alliance and prevented Muslim control.

Thereafter, the princes of Jaipur and Jodhpur regained the right to enter into marital relations with the Udaipur family (which had ceased to be friendly with the Mughals) on the condition that the children born to the princesses of Udaipur would be the first heirs.

But due to the quarrels arising from this condition, the dominance of Marathas finally came to an end here. During Aurangzeb, the struggle between Aurangzeb and Jodhpur state continued for a long time after the death of Jaswant Singh, the ruler of Jodhpur (1678 AD). This struggle took place over the throne of Ajit Singh (son of Jaswant Singh) over the throne of Jodhpur. The struggle ended only after the death of Aurangzeb (1707 AD) during the Mughal emperor Farrukhshahr. In 1818, Jodhpur came under British rule. It joined the state of Rajasthan in 1949

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