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हरि राम जी की कथा लिरिक्स ! Hari ram ji ki katha lyrics

हरिराम जी की कथा लिरिक्स Hariraam ji ki katha lyrics

मारवाड़ के बीच में नगर झोरडा गांव
रामरतन सूत्र लाडला जागो हरीराम जी नाम
हरिराम जी की कथा कहो सुनो ध्यान लगाए
भूल चूक मारी माफ करो रखियो मोरी लाज

हरिराम जी ने धावे जाना दुख मिट जावे हूं
धोरा री धरती रो सोचो देवता

नगर झोरड़ा में कोई साधुड़ा सा आया रे
बस्तीरा पावा लागण चालिया

सरा बस्ती रा लोग पावा लागण चाल्या रे
साथ तो हो गया रे हरिराम जी

धोंधालिए धोरा में गुरुजी काली नागण डोली जी
फोगा मैं घरनावे बैरन बांडली

एडी चाले टेडी चालें  टेढ़ा डंक लगावे जी
जहर तो फैला दें सारा गात मैं

दिन में हाली हलियो जोव सांझ पड़या घर आवे जी
सुता ने पी जावे बेरी पिवनों

बालाजी को धुपियो तू खेजे छोरा हरिया वो
भक्ति करजे भगवान की

रहनो पड़सी जुग में कंवरो छोरा हरिया र
बर्मचारी को पालन पाल जे

निचोड़ा घराम जाबो छोड़ छोरा हरिया र
आपा तो कहिजा ब्राह्मण दायमा

बालाजी की भभूती ले जावो मेरा काका जी
घोल तो पिलादयो काचा दूध म

अर्जी मांकी मर्जी थांकी सूंज्यो सुसरा म्हारा जी 
नाया की छोरी ने बोल्या बोलना

मोड़ो आयो बाणिया तू बिजा का ब्योपारी जी
बीज तो बेचाला महंगा मोल का

माणस बनाया थान क्यो ना भगवान जी
क्यो ना तो बनाया बन का पाढिया

बालाजी की भभुती ले जाओ सेठ म्हारा जी
घोल तो पिलादयो काचा दूध म

मन्दिर चिनादयो धणी को देवरों चिनादयो जी
नुत तो जीमादयो नगरी झोटडो

हरिराम जी ने धावे जाना दुख मिट जावे हूं
धोरा री धरती रो सोचो देवता

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 तो दोस्तो आज मे हम आपके इन्हीं सवालों के जवाब इस पोस्ट में दूंगा 


मंदोदरी कोन थी :- पुरानी कथाओं के अनुसार बताते है की मंदोदरी एक मेंढकी थी एक समय बात है ! 

सप्तऋषि खीर बना रहे थे उस खीर में एक सर्प गिर गया ये सब मंदोदरी ने देख लिया


 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


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