Skip to main content

जब एक सूअर के लिए भीड़ गए थे अमेरिका ओर ब्रिटेन ! सूअर की लड़ाई pig war

जब एक सूअर के लिए अमेरिका और ब्रिटेन में होने वाला था भयंकर युद्ध 


War of America vs britian :- 
यह बात 1846 का है, जब ब्रिटेन अपने साम्राज्य विस्तार के अंतिम चरण में था, अमेरिका और ब्रिटेन के बीच रॉकी पहाड़ और प्रशांत तट पर विवाद चल रहा था और यह विवाद ओरेगॉन संधि ( oregon sandhi) के द्वारा हल हो गया था।



British army vs american army
British aarmy vs american army

 इस संधि से अमेरिका, ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका ( आज का कनाडा) में सीमा विभाजन 49 पैरेलल लाइन के द्वारा हो गया । मगर  प्रशांत तट सागर के उस क्षेत्र में एक द्वीप था  जिसका नाम था सैन जुआन द्वीप उस द्वीप पर किसी का भी हक नहीं था । समय बीतता गया कुछ लोग अमेरिका के तो कुछ लोग ब्रिटेन के वहा घर बनाकर रहने लगे


ब्रिटेन की हडसन बे कम्पनी भी यहां स्थापित हो गई और अमेरिका से भी काफी मात्रा में यहां इस द्वीप पर आ गए दोनों देशों के नागरिक प्रेम से रह रहे थे
The pig war, war of pig
The pig war war of pig


The pig war/ सूअर की लड़ाई :- 15 जून 1859 को एक ब्रिटिश नागरिक का सूअर अमेरिकी नागरिक लाइमैन कटलर के खेत में घुस गया और आलू खाने लगा लाइमैन ने उसके उपर गोली चला दी और वो मर गया  यह सूअर हडसन कम्पनी के कर्मचारी चार्ल्स ग्रिफ्फिन का था वो आ गया लाइमैन ने उस हर्जाने के तौर पर 10 डॉलर देना चाहा मगर चार्ल्स ने मना कर दिया और ब्रिटिश अधिकारियों से शिकायत कर दी 

इधर लाइमैन ने भी अमेरिकी सेना ( american army ) से मदद की गुहार लगा दी उनकी ये याचिका जनरल विलियम एस. हॉर्ने ने सुनी जो की ब्रिटिशों से नफ़रत करता था उसने बिना देरी करे 27 जुलाई 1859 को अपनी सेना कि एक टुकड़ी जुआन द्वीप भेज दी ब्रिटिश गवर्नर को पता चला तो उसने ब्रिटिश सेना ( british army ) की 3 टुकड़ी जुआन भेज दी
अमेरिका और ब्रिटेन की लड़ाई
अमेरिकी सेना ब्रिटिश सेना की लड़ाई



दोनों सेना आमने सामने आ गई और डटी रही धीरे धीरे दोनों सेनाओं की संख्या भी बढ़ने लगी युद्ध शुरू होने के अंतिम छोर पर पहुंच गया

 तभी वहा ब्रिटिश नेवी ( british nevi) के कमांडर इन चीफ रोबर्ट एल बेंस पहुंचे वो भी वहा युद्ध में ब्रिटिश सेना  को मजबूती देने ही आए थे मगर जब उनको पता चला की युद्ध एक सूअर के लिए शुरू होने वाला है तभी उसकी अमेरिकी सेना पर हमला करने का आदेश मिला मगर उन्होंने माना कर दिया और कहा कि एक सूअर के लिए दो इतने बड़े देश युद्ध नहीं कर सकते 
War of america vs britian
War of america vs britian


आखिरकार इस बात की गंभीरता दोनों देशों की सरकार को पता चली कि एक सूअर के लिए दोनों देशों के 3 युद्ध पोत ओर 2600 सैनिक तैनात कर दिया गया है ओर दोनों देशों ने बातचीत से मसले को हल करने पर जोर दिया

आखिरकार दोनों देशों ने फैसला किया कि इस द्वीप पे 100 से ज्यादा लोग नहीं रहेंगे फिर ब्रिटिश आर्मी ( british army ) ने अपने कैंप उत्तरी द्वीप पे लगा दिए और अमेरिकी सेना ( american army) ने दक्षिणी द्वीप पर लगा दिए स्थिति सन 1872 तक इसी तरह ही रही ओर 1872 में ही जर्मनी के कैसर विल्हेल्म प्रथम इंटरनेशनल कमिशन द्वारा ये द्वीप पूरी तरह अमेरिका को दे दिया इस युद्ध को ही सूअर की लड़ाई या ( The war of pig ) के नाम से जाना जाता है

इसके साथ ही इस द्वीप के सारे विवाद समाप्त हो गए आज भी सैन जुआन द्वीप में तब के बनाए कैंप मौजूद हैं , अब इसे नेशनल हिस्टोरिकल पार्क के रूप में बदल दिया गया है  

Comments

Popular posts from this blog

मंदोदरी के पिता का क्या नाम था ? पूर्व जन्म की कथा

मंदोदरी के पिता का क्या नाम था

नमस्कार दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम मंदोदरी के पूर्व जन्म की कथा की जानकारी आपको देंगे

 साथ ही मंदोदरी कि कुछ सूक्ष्म जानकारी भी आपको देंगे की मंदोदरी के पिता का क्या नाम था

 तो दोस्तो आज मे हम आपके इन्हीं सवालों के जवाब इस पोस्ट में दूंगा 


मंदोदरी कोन थी :- पुरानी कथाओं के अनुसार बताते है की मंदोदरी एक मेंढकी थी एक समय बात है ! 

सप्तऋषि खीर बना रहे थे उस खीर में एक सर्प गिर गया ये सब मंदोदरी ने देख लिया


 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


ऋषियों ने समझ लिया कि इस मेंढकी  ने हमे बचाने के लिए अपने प्राण त्याग दिए उन्होंने मंदोदरी को वापस जीवन दान दिया और एक कन्या का रूप दिया तब से कहा जाता हैं की मंदोदरी सप्तऋषियों की संतान थी


अब मंदोदरी सप्तऋषियों के साथ ही रहने लगी मगर ऋषियों ने  सोचा कि एक कन्य…

युधिष्ठिर को धर्म राज क्यो कहा जाता हैं ?

नमस्कार दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम बात करेंगे कि युधिष्ठिर को धर्म राज क्यो कहा जाता हैं क्या इसमें कुछ रहस्य है अगर है तो वो क्या है जिससे कि युधिष्ठिर को धर्म राज की उपाधि मिली 

अगर आपके मन में भी ये सवाल जागा है तो आप सही जगह आ गए हैं में इस पोस्ट हम आज आपके इसी सवाल का जवाब देने की कोशिश करेंगे 

दोस्तो युधिष्ठर की धर्मराज उपाधि की कहानी को समझने से पहले हमें यमराज की छोटी सी कहानी को समझना जरूरी है पर आप घबराइए नहीं ये कहानी बिल्कुल सूक्ष्म होगी तो चलिए शुरू करते है


हिंदू धर्म शास्त्रों में यम को मृत्यु का देवता माना गया है। यमलोक के राजा होने के कारण वे यमराज भी कहलाते हैं। यम सूर्य के पुत्र हैं और उनकी माता का नाम संज्ञा है। उनका वाहन भैंसा और संदेशवाहक पक्षी कबूतर, उल्लू और कौवा भी माना जाता है। उनका हथियार गदा है। यमराज अपने हाथ के कालसूत्र या कालपाश रखते हैं, जिससे वे किसी भी जीव के प्राण निकाल लेते हैं। कहते हैं जब जीवित प्राणी का संसार में काम पूरा हो जाता है तो उसके शरीर से प्राण यमराज अपने कालपाश से खींच लेते हैं, ताकि प्राणी फिर नया शरीर व नया जीवन शुरू कर सके। यमपुरी यम…

सूर्पनखा का असली नाम क्या था ! सूर्पनखा के पति का नाम क्या था ! Surpankha

सूर्पनखा का असली नाम क्या था [ surpankha ka asali name kya tha ]
सूर्पनखा के पति का क्या नाम था [ surpankha ke pati ka kya name tha ] 

नमस्कार दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम बात करेंगे कि रावण की बहन सुरपंखा या सूर्पनखा के पति का क्या नाम था और सूर्पनखा का असली नाम क्या था

दोस्तो सूर्पनखा रावण की बहन थी उसका असली नाम सूप नखा था जिसका अर्थ होता है सुंदर नाखूनों वाली 

क्योंकि सूर्पनखा इतनी सुंदर थी कि पुरुष उसके नाखूनों को देखकर ही मोहित हो जाते थे इसलिए उसका नाम सूप नखा पड़ा 


सूर्पनखा के पति का क्या नाम था :- सूर्पनखा के पति का नाम विधुतजिव्ह था जो कि कालकेय नाम के राजा का सेनापति था एक बार कालकेय ओर रावण में युद्ध हो गया और कालकेय की सेना का नेतृत्व जहा विधुतजिव्ह कर रहा था तो दूसरी ओर रावण की सेना का नेतृत्व स्वयं रावण कर रहा था

विधुतजिव्ह के सामने परिस्थिति कठिन थी क्योंकि उसका कर्तव्य बनता था कि अपने राज्य की रक्षा करे मगर ऐसा करता है तो सामने उसका खुद का शाला ही था 

सूर्पनखा ने रावण को समझाया था कि कालकेय की राजधानी पर आक्रमण मत करो मगर रावण अपने राज्य के विस्तार की लालसा में अंधा हो ग…