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जब एक बाल्टी के लिए मारे गए थे 2000 सैनिक war of bucket in hindi

जब एक बाल्टी के लिए मारे गए थे 2000 सैनिक 
War of bucket in Hindi

नमस्कार दोस्तों

वैसे तो इतिहास में बहुत से युद्ध हुए ओर बहुत से सैनिकों को अपनी जान गवानी पड़ी पर इतिहास में कुछ ऐसे युद्ध भी हुए जो कि बिल्कुल मामूली सी चीज के लिए लड़े गए और उन्ही युद्धों में एक नाम आता है  [ War of the Bucket  ] बाल्टी का युद्ध ! और इस युद्ध में 2000 से ज्यादा सैनिक मारे गए । 


तो दोस्तो आज ह हम इस बाल्टी के युद्ध के बारे में जानेंगे कि ये युद्ध किन कारणों से हुआ और कोन कोन सी सेनाओं के बीच लड़ा गया । 

बाल्टी का युद्ध कब और किसके साथ हुआ
बाल्टी का युद्ध कब और किसके साथ लड़ा गया

बाल्टी का युद्ध कब और किसके साथ हुआ


बात सन 1325 की है बोलोग्ना और मोडेना राज्यो के बीच बेहद तनाव था दोनों राज्यो के सैनिक बॉर्डर पे रोजाना एक दूसरे से भिड़ जाते थे दोनों शहरों के बीच 50 km का ही फासला था 


बोलोग्ना राज्य को ईसाई धर्म गुरु पॉप का समर्थन था तो मोडेना राज्य को रोमन साम्राज्य का समर्थन था। सितंबर 1325 की किसी रात को मोडेना राज्य के कुछ सैनिक बोलोग्ना राज्य में घुस गए और वहां से एक बाल्टी चुरा ली जब इस बात का पता जब बोलोग्ना राज्य के सम्राट को पता चला तो उन्होंने बाल्टी वापस करने को कहा मगर मोडेना राज्य के राजा ने मना कर दिया इससे नाराज होकर बॉलोगना राज्य ने युद्ध की घोषणा कर दी

War of bucket in Hindi
War of bucket in Hindi


बोलोग्ना के  32 सैनिक युद्ध करने आ गए वहीं मोडेना के पास 7 हजार सैनिक थे 15 नवम्बर 1325 की सुबह  युद्ध शुरू हो गया और आधी रात तक चला इस युद्ध में दोनों पक्षों के 2000 से ज्यादा सैनिक मारे गए अंत में बोलोग्ना राज्य ने अपनी हार स्वीकार कर ली 


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एक साल बाद दोनों राज्यो में समझोता हुआ पर कोई फायदा नही मिला तनाव वैसे ही चलता रहा फिर 1529 जब स्पेन का हमला हुआ तब दोनों राज्य एक साथ हो गए और स्पेन के हमले का जवाब दिया आज भी वो बाल्टी वहा रखी हुई है जिसके लिए युद्ध लड़ा गया था 


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तो दोस्तो आशा करते है कि यह पोस्ट अच्छी लगी होगी और पोस्ट पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग को फॉलो करें इस पोस्ट को whats'app और Facebook , पर शेयर जरुर करें पोस्ट पढ़ने के लिए ए आपका धन्यवाद 


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 तो दोस्तो आज मे हम आपके इन्हीं सवालों के जवाब इस पोस्ट में दूंगा 


मंदोदरी कोन थी :- पुरानी कथाओं के अनुसार बताते है की मंदोदरी एक मेंढकी थी एक समय बात है ! 

सप्तऋषि खीर बना रहे थे उस खीर में एक सर्प गिर गया ये सब मंदोदरी ने देख लिया


 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


ऋषियों ने समझ लिया कि इस मेंढकी  ने हमे बचाने के लिए अपने प्राण त्याग दिए उन्होंने मंदोदरी को वापस जीवन दान दिया और एक कन्या का रूप दिया तब से कहा जाता हैं की मंदोदरी सप्तऋषियों की संतान थी


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