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रावण शिव धनुष को क्यो नही उठा पाया ! कारण जानिए ! History of Ravan


रावण शिव धनुष को क्यो नही उठा पाया History of Ravan
रावण शिव धनुष को क्यो नही उठा पाया, History of ravan
रावण शिव धनुष को क्यो नही उठा पाया

आप सभी के मन में एक सवाल जरुर आया होगा कि जब अगर रावण भगवान शंकर का बड़ा भक्त था और बलिष्ठ भी था तो फिर वह सीता जी के स्वयंवर में शिव धनुष को क्यो नही उठा पाया ? 
तो आइए इसका कारण जानते है 
इस कहानी के दो पहलू है


पहली कहानी
  जब रावण ने भगवान शंकर की पूजा की भगवान शंकर ने उसकी पूजा पे प्रसन्न होकर उसे वरदान देने की बात कही तब भगवान  से रावण ने उनसे पिनाक धनुष और उसके एक बाण को मांग लिया वो बाण रावण का मोक्ष बाण था


भगवान शंकर ने उसे दे दिया मगर ये कहा कि अगर इस धनुष को तुम यहां से उठाने के बाद कहीं और रख दोगे तो तुमसे हिलेगा भी नहीं रावण ने कहा ठीक है में इसे लंका में ही रखूंगा


मगर जब रावण जनकपुरी के पास आया तो उसे लघु शंका होगई ओर लघु शंका करने के लिए उसने धनुष को वहीं रख दिया वह भूल गया था कि इसे कहीं रखना नहीं है फिर रावण से वो धनुष नहीं उठ पाया


दूसरी कहानी
एक रामायण में चौपाई है " रावण बाण छुवा नहीं चापा "

मतलब रावण ओर बाणासुर ने शिव धनुष को छुआ तक नहीं आप दोनों में से कौनसी मानते है आप पर निर्भर है
की आप इनमें कोनसे तथ्य को मानते है
दूसरी कहानी को पूरी यहां पड़े दूसरी कहानी

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सप्तऋषि खीर बना रहे थे उस खीर में एक सर्प गिर गया ये सब मंदोदरी ने देख लिया


 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


ऋषियों ने समझ लिया कि इस मेंढकी  ने हमे बचाने के लिए अपने प्राण त्याग दिए उन्होंने मंदोदरी को वापस जीवन दान दिया और एक कन्या का रूप दिया तब से कहा जाता हैं की मंदोदरी सप्तऋषियों की संतान थी


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