Skip to main content

2000 के नोट होंगे बंद ! आज की ताजा खबर ! Aaj ki taza khabar

Aaj ki taza khabar

अब नहीं निकाल पाएंगे 2000 के नोट एटीएम से
2000 रुपए के नोट :- अब आप देश के किसी भी ATM से 2000 के नोट नहीं निकाल सकते हैं देश के सभी ATM मशीनों से 2000 रुपए के नोट हटाना बैंको ने शुरू कर दिया है अब आप 500 , 200 , ओर 100 के नोट ही ATM से निकाल सकते है ।


Aaj ki taza khabar
Aaj ki taza khabar


हालाकि 2000 के नोट मान्य होंगे बस आप उन्हें ATM से नहीं निकाल सकते सभी सरकारी बैंको का कहना है कि आम लोग 2000 रुपए के नोट ATM से निकलने के बाद उनके छुट्टे करवाने के लिए बैंकों की शाखाओं में जाते है ओर वहा भीड़ हो जाती हैं इसलिए ये फैसला लिया गया है



वैसे आपको बता दे कि सरकार भी धीरे धीरे इन 2000 के नोटों को बंद करने के बारे मैं सोच रही है ओर इन नोटों को आरबीआई की करेंसी चेस्ट में जमा किया जा रहा है ओर लगभग सभी बैंक अपनी अपनी शाखाओं से 2000 के नोट वापस मांग रहे है


आपको बता दें कि 8 नवम्बर 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी ने 1000 ओर 500 के नोट बंद कर दिया गया था और इनकी जगह 500 ओर 2000 के नए नोट लेकर आए थे 


22 ct gold price today

Comments

Popular posts from this blog

मंदोदरी के पिता का क्या नाम था ? पूर्व जन्म की कथा

मंदोदरी के पिता का क्या नाम था

नमस्कार दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम मंदोदरी के पूर्व जन्म की कथा की जानकारी आपको देंगे

 साथ ही मंदोदरी कि कुछ सूक्ष्म जानकारी भी आपको देंगे की मंदोदरी के पिता का क्या नाम था

 तो दोस्तो आज मे हम आपके इन्हीं सवालों के जवाब इस पोस्ट में दूंगा 


मंदोदरी कोन थी :- पुरानी कथाओं के अनुसार बताते है की मंदोदरी एक मेंढकी थी एक समय बात है ! 

सप्तऋषि खीर बना रहे थे उस खीर में एक सर्प गिर गया ये सब मंदोदरी ने देख लिया


 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


ऋषियों ने समझ लिया कि इस मेंढकी  ने हमे बचाने के लिए अपने प्राण त्याग दिए उन्होंने मंदोदरी को वापस जीवन दान दिया और एक कन्या का रूप दिया तब से कहा जाता हैं की मंदोदरी सप्तऋषियों की संतान थी


अब मंदोदरी सप्तऋषियों के साथ ही रहने लगी मगर ऋषियों ने  सोचा कि एक कन्य…

युधिष्ठिर को धर्म राज क्यो कहा जाता हैं ?

नमस्कार दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम बात करेंगे कि युधिष्ठिर को धर्म राज क्यो कहा जाता हैं क्या इसमें कुछ रहस्य है अगर है तो वो क्या है जिससे कि युधिष्ठिर को धर्म राज की उपाधि मिली 

अगर आपके मन में भी ये सवाल जागा है तो आप सही जगह आ गए हैं में इस पोस्ट हम आज आपके इसी सवाल का जवाब देने की कोशिश करेंगे 

दोस्तो युधिष्ठर की धर्मराज उपाधि की कहानी को समझने से पहले हमें यमराज की छोटी सी कहानी को समझना जरूरी है पर आप घबराइए नहीं ये कहानी बिल्कुल सूक्ष्म होगी तो चलिए शुरू करते है


हिंदू धर्म शास्त्रों में यम को मृत्यु का देवता माना गया है। यमलोक के राजा होने के कारण वे यमराज भी कहलाते हैं। यम सूर्य के पुत्र हैं और उनकी माता का नाम संज्ञा है। उनका वाहन भैंसा और संदेशवाहक पक्षी कबूतर, उल्लू और कौवा भी माना जाता है। उनका हथियार गदा है। यमराज अपने हाथ के कालसूत्र या कालपाश रखते हैं, जिससे वे किसी भी जीव के प्राण निकाल लेते हैं। कहते हैं जब जीवित प्राणी का संसार में काम पूरा हो जाता है तो उसके शरीर से प्राण यमराज अपने कालपाश से खींच लेते हैं, ताकि प्राणी फिर नया शरीर व नया जीवन शुरू कर सके। यमपुरी यम…

सूर्पनखा का असली नाम क्या था ! सूर्पनखा के पति का नाम क्या था ! Surpankha

सूर्पनखा का असली नाम क्या था [ surpankha ka asali name kya tha ]
सूर्पनखा के पति का क्या नाम था [ surpankha ke pati ka kya name tha ] 

नमस्कार दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम बात करेंगे कि रावण की बहन सुरपंखा या सूर्पनखा के पति का क्या नाम था और सूर्पनखा का असली नाम क्या था

दोस्तो सूर्पनखा रावण की बहन थी उसका असली नाम सूप नखा था जिसका अर्थ होता है सुंदर नाखूनों वाली 

क्योंकि सूर्पनखा इतनी सुंदर थी कि पुरुष उसके नाखूनों को देखकर ही मोहित हो जाते थे इसलिए उसका नाम सूप नखा पड़ा 


सूर्पनखा के पति का क्या नाम था :- सूर्पनखा के पति का नाम विधुतजिव्ह था जो कि कालकेय नाम के राजा का सेनापति था एक बार कालकेय ओर रावण में युद्ध हो गया और कालकेय की सेना का नेतृत्व जहा विधुतजिव्ह कर रहा था तो दूसरी ओर रावण की सेना का नेतृत्व स्वयं रावण कर रहा था

विधुतजिव्ह के सामने परिस्थिति कठिन थी क्योंकि उसका कर्तव्य बनता था कि अपने राज्य की रक्षा करे मगर ऐसा करता है तो सामने उसका खुद का शाला ही था 

सूर्पनखा ने रावण को समझाया था कि कालकेय की राजधानी पर आक्रमण मत करो मगर रावण अपने राज्य के विस्तार की लालसा में अंधा हो ग…