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Chetavani bhajan lyrics | बड़े बड़े ऋषियों का मारा मान लुगाई ने

चेतावनी भजन लिरिक्स

  Chetavani-bhajan-lyrics, Bhajan-lyrics
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दोहा- जे सुख चावे जीव का चीज छोड़ दें चार
         चोरी जुवा जामनी और पराई नार
         चोरी कैद कराय दे और जुआ दे हरवा
         घर बिकवादे दे जामनी और नार दे मरवा

भजन सबसे बड़ा अधिकार दिया करतार लुगाई ने

टेर-  सबसे बड़ा अधिकार दिया करतार लुगाई ने
         बड़े बड़े ऋषियों के मारे मान लुगाई ने


बोल-  कैकई जुलम किया था मोटा
         भूप से बचन मांग लिया खोटा
         दे दिया चौदहा वर्ष देसोटा
        दिया बनवास लुगाई ने
       दशरथ से योद्धा के ले लिया प्राण लुगाई ने
       सबसे बड़ा अधिकार..........................


बोल- सावित्री अश्वपति की जाई
         वा तो सत्यवान संग ब्याही
        पति को यम से छुड़ा कर लयाही
        दिया जीवदान लुगाई ने
        यमराज से देव का मारा मान लुगाई ने
        सबसे बड़ा अधिकार....................


बोल- इन्द्र किया था नीच विचार
       गोतम घर छेड़ी अहिल्या नार
      भाग फिर हो गए उसके हजार
        दिलवाया श्राप लुगाई ने
      चन्द्रमा के लगा दिया काला दाग लुगाई ने
      सबसे बड़ा अधिकार........................



बोल- तुलसी था पत्नी का दास
        पीहर में गया बहू के पास
        भक्त फिर बन गया तुलसी दास
         दिया गुरु ज्ञान लुगाई ने
        नारद की बंदर सी करदी शान लुगाई ने
        सबसे बड़ा अधिकार......................


बोल- कहना सही विष्मभर का
       इसमें लावालेश नहीं मन का
      जगदेव कुमार के शर का
      लिया जब दान लुगाई ने
      जयचंद से राजा का मारया मान लुगाई ने
     सबसे बड़ा अधिकार दिया करतार लुगाई ने
     बड़े बड़े ऋषियों के मारे मान लुगाई ने






नमस्कार दोस्तों हमारे ब्लॉग पर आप सभी का स्वागत है में इस ब्लॉग पर पुरानी कथा और भजन लिरिक्स के पोस्ट लाता रहता हूं तो आप अभी हमारे ब्लॉग को फॉलो कर सकते हैं और अगर ये पोस्ट अच्छी लगी तो इसे लाईक और शेयर करें ब्लॉग पर आने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद
       

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 तो दोस्तो आज मे हम आपके इन्हीं सवालों के जवाब इस पोस्ट में दूंगा 


मंदोदरी कोन थी :- पुरानी कथाओं के अनुसार बताते है की मंदोदरी एक मेंढकी थी एक समय बात है ! 

सप्तऋषि खीर बना रहे थे उस खीर में एक सर्प गिर गया ये सब मंदोदरी ने देख लिया


 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


ऋषियों ने समझ लिया कि इस मेंढकी  ने हमे बचाने के लिए अपने प्राण त्याग दिए उन्होंने मंदोदरी को वापस जीवन दान दिया और एक कन्या का रूप दिया तब से कहा जाता हैं की मंदोदरी सप्तऋषियों की संतान थी


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विधुतजिव्ह के सामने परिस्थिति कठिन थी क्योंकि उसका कर्तव्य बनता था कि अपने राज्य की रक्षा करे मगर ऐसा करता है तो सामने उसका खुद का शाला ही था 

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