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अहिल्या के पिता का नाम क्या था ! Ahilya stori

अहिल्या के पिता का नाम क्या था
अहिल्या की संपूर्ण कथा

अहिल्या के पिता का नाम क्या था, अहिल्या की संपूर्ण कथा
अहिल्या के पिता का नाम क्या था , अहिल्या की संपूर्ण कथा


पौराणिक कथाओ और मान्यताओ के अनुसार अहिल्या गौतम ऋषि की नार जो की गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर की बन गई थी वो सप्त कन्याओ मे से ही एक थी ये सप्त कन्याऐ सप्तर्षियोके समान ही तेजस्वी तथा गुणवत्ता से परिपूर्ण थी



अहिल्या के पिता का नाम :-


अहिल्या के पिता का नाम ब्रह्मा था अहिल्या गौतम रिषि की पत्नी थी अहिल्या और गौतम के दो सन्तान थी जिनमे एक पुत्र और एक पुत्री थी पुत्र का नाम सतानंन्द था तथा पुत्री का नाम का नाम  अंजना था


अहिल्या पत्थर की मूर्ति क्यो बनी


एक बार देवराज इन्द्र के मन मे मृत्युलोक की सबसे सुंदर स्त्री के साथ कामक्रिङा करने की वासना जाग गई

तो देवराज इन्द्र ने सुर्य को बुलाकर पुछा की पृथ्वी पे सबसे सुन्दर स्त्री कोन है

सुर्य ने कहा की महाराज मेरे तेज मे कोई भी सुन्दर स्त्री बाहर नही निकलती है मुझे पता नही आप चंद्रमा से पुछीये

देवराज इंद्र ने चंद्रमा से पुछा

तो चंद्रमा ने जबाब दिया की महाराज गौतम की नारी अहिल्या संसार की सबसे सुन्दर स्त्री है

फिर इन्द्र खुद गौतम का स्वरूप बनाया और चंद्रमा को एक मुर्गे का स्वरूप बनाने को कहा

और दोनो गौतम के आश्रम पर पहुंच गये

गौतम का एक नियम था की वह सुबह 4 बजे मुर्गे की आवाज सुनकर गंगा स्नान के लिए जाया करते थे

और उस रात जब चंद्रमा जो की मुर्गे बना हुआ था उसने आधी रात के समय ही आवाज लगा दी

गौतम को लगा की 4 बज गये है गौतम ने अपनी धोती कमण्डल उठाया और स्नान के लिए चले गए

पिछे से जो देवराज इंद्र गौतम बना हुआ था वो ऋषि गौतम के आश्रम मे अहिल्या के पास चला गया

गौतम ॠषी जैसे ही गंगा किनारे पहुचा ओर अपनी धोती को गंगा मे ढुबोया गंगा महारानी प्रकट होकर गौतम को सारी बात बता दी

गौतम ॠषि क्रोधित होकर अपनी गीली धोती को लेकर वापस अपने आश्रम पहुचा गौतम ॠषि को आता देख चंद्रमा भागने लगा भागते हुए चंद्रमा के उपर गौतम ॠषि ने अपनी गीली धोती से वार किया और चंद्रमा को श्राप दिया की ये दाग तुम्हारा कभी नही जायेगा

आश्रम मे आकर गौतम ऋषि ने अपनी पुत्री को श्राप दिया की जाओ तुम्हारे कुंवारी के कलंक लगेगा

अपने पुत्र को श्राप दिया की तु मती का मंद हो जायेगा

अहिल्या को श्राप दिया की तु पत्थर की शीला बन जा

देवराज इंद्र को श्राप दिया की तुम्हारे शरीर मे एक हजार भग हो जायेगी

जब अंजना ने माफी मांगी तो गौतम ऋषि ने कहा की तुम्हारे कुंवारी के पुत्र तो होगा मगर वो बहुत ही बलवान होगा और पूजनीय होगा

सतानंन्द ने प्राथना की तो गौतम ने कहा कि जब त्रेता के चौथे चरण मे राम का अवतार होगा और अगर उनकी शादी मे फेरे तुम्हारे द्वारा होंगे तब तुम्हारा उद्धार होगा

अहिल्या ने प्राथना की तो गौतम ऋषि ने कहा कि जब क्षीराम तुम्हारे चरण लगायेंगे तब तुम्हारा उद्धार होगा



अहिल्या के उद्धार की कथा  :-


 जब श्री राम चन्द्र जी मुनी विश्वामित्र की यज्ञ की रक्षा के लिए गुरू जी के साथ आये थे तब रास्ते मे गौतम ऋषि का आश्रम आया वहा कोई भी जिव जन्तु नही थे केवल एक पत्थर की शिला ।

उस शिला को देखकर श्री राम जी ने अपने गुरू से पुछा की गुरूदेव यह पत्थर की शिला क्या है

तब मुनी विश्वामित्र जी ने राम से कहा कि पुत्र ये गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या है और यह अपने पति के श्राप से पत्थर की वन गई है और अब यह आपके चरणो की रंज चाहती है आप अपने चरण ईसके लगाओ और ईसका उद्धार करो

तब श्री राम जी ने मर्यादा पुरुषोत्तमता का परिचय देते हुए कहा कि गुरूदेव ये एक ब्राह्मण स्त्री है हम क्षत्रिय हम ब्राह्मण और स्त्री के पैर नही लगा सकते

तब विश्वामित्र ने श्री राम जी को उपाय बताया कि आप चरण नही लगा सकते तो ईनके चारो ओर परिक्रमा ही लगा दो आपके चरणो की रंज इसके लगेगी और इसका उद्धार हो जाएगा श्री राम जी ने ऐसा ही किया तथा उनके चरणों की रंज शिला के लगी और अहिल्या का उद्धार हुआ तथा श्री राम जी के आशिर्वाद से वो अपने पति धाम चली गई

नमस्कार दोस्तों हमारे ब्लॉग पुरानी कथा पर आप सभी का स्वागत है में इस ब्लॉग पर Purani katha और Bhajan lyrics और Song lyrics / के पोस्ट लाता रहता हूं तो आप हमसे जुड़े रहे और हमारे ब्लॉग को फॉलो करें आपको ये पोस्ट कैसी लगी जरूर बताएं
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सप्तऋषि खीर बना रहे थे उस खीर में एक सर्प गिर गया ये सब मंदोदरी ने देख लिया


 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


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