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Mira bai bhajan lyrics, गिरधर आवो तो सही लिरिक्स

मीरा बाई भजन लिरिक्स
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भजन



गिरधर आवो तो सही
मोहन आवो तो सही
माधो रा मन्दिर में मीरा
एकली खड़ी



थे कहो तो सांवरिया
में बाजू बंद बन जाऊ
बाजू बंद बन जाऊ थारा
हाथों में रम जाऊ
गिरधर आवो तो....



थे कहो तो सांवरिया
में मौर मुकुट बन जाऊ
मोर मुकुट बन जाऊ थारा
केशा में रम जाऊ
गिरधर आवो तो सही......




थे कहो तो सांवरिया
में बांसुरिया बन जाऊ
बासुरिया बन जाऊ थारा
होटा से मिल जाऊ
गिरधर आवो तो सही.....




थे कहो तो सांवरिया
में पग पायल बन जाऊ
पग पायल बन जाऊ थारा
चरना में रम जाऊ
गिरधर आवो तो सही...




नमस्कार दोस्तों हमारे ब्लॉग पर आप सभी का स्वागत है में इस ब्लॉग पर पुरानी कथा और भजन लिरिक्स के पोस्ट लाता रहता हूं तो आप हमसे जुड़े रहे और हमारे ब्लॉग को फॉलो करें अगर ये पोस्ट अच्छी लगी तो इसे लाईक और शेयर करें इस पोस्ट को को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद

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 तो दोस्तो आज मे हम आपके इन्हीं सवालों के जवाब इस पोस्ट में दूंगा 


मंदोदरी कोन थी :- पुरानी कथाओं के अनुसार बताते है की मंदोदरी एक मेंढकी थी एक समय बात है ! 

सप्तऋषि खीर बना रहे थे उस खीर में एक सर्प गिर गया ये सब मंदोदरी ने देख लिया


 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


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