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गोगाजी महाराज की सम्पूर्ण कथा / story of gogaji maharaj / goga ji Maharaj ki katha

           गोगा जी महाराज की सम्पूर्ण कथा


राजस्थान के पूजनीय लोक देवता की सम्पूर्ण कथा


गोगा जी महाराज की सम्पूर्ण कथा, story of goga ji Maharaj,  goga ji Maharaj ki katha
गोगा जी महाराज की सम्पूर्ण कथा




कहते है की राजस्थान की धरती हमेशा वीर और देवी देवताओ को जन्म देती और राजस्थान की पावन धरती पर अनेक देवी देवताओ और वीर पुरूषो ने जन्म लिया है दीन एवं दुखी जनो के कष्टो का निवारण कीया है और इन्ही मे से एक है गोगा जी महाराज

 गोगा जी महाराज की जन्म  कथा:-

 गोगा जी महाराज का जन्म विक्रमी संवत 1003 को राजस्थान के चुरू जिले के ददरेवा गांव मे हुआ इनकी माता का नाम बाछल और पिता का नाम जेवर सिंह चौहान था तथा गोगाजी महाराज के गुरू का नाम गोरखनाथ महाराज था और गुरू गोरखनाथ के आशिर्वाद के कारण ही इनका जन्म हुआ था

लोक मान्यता के अनुसार माता बाछल के घर मे कोई सन्तान नही थी और एक गुरू गोरखनाथ का एक शिष्य माता बाछल के महल मे आकर भिक्षा मांगी माता बाछल ने चावल और मुंग उसको भिक्षा मे देना चाही तो उस शिष्य ने मना कर दिया की माता हमे तो अपने बच्चो का झूठा भोजन ही ला दो हम चावल और मुंग नही लेगे तब माता बाछल बङी दुखी होकर कहने लगी की महाराज मेरे घर में तो कोई बालक है ही नही और इस कारण मे बङी दुखी भी हु तो शिष्य ने कहा माता आप हमारे गुरू गोरखनाथ की पूजा करो अगर आपको उनका आशीर्वाद मिल गया तो आपके घर मे जरूर सन्तान होगी

माता बाछल ने वही कीया वह गोरखनाथ की कुटिया पर जाकर उनकी सेवा करने लगी गोरखनाथ ध्यान मे बैठे हुए थे और माता बाछल उनकी सेवा करती रहती थी एक दीन जब गोरखनाथ ध्यान मे बैठे हुए थे तब बाछल की एक बहन थी काछल उसे पता चल गया था बाछल पुत्र प्राप्ति के लिए गुरू गोरखनाथ की सेवा करने जाती है वह भी गुरू गोरखनाथ की पूजा करने गोरखनाथ की कुटिया पर चली गई क्योंकि उसके भी कोई सन्तान नही थी जब काछल उनकी सेवा कर रही थी उसी वक्त संयोग से गोरखनाथ ने अपनी समाधी छोङी और देखा कि एक स्त्री उनकी कई दिनो से पूजा कर रही है इसलिए उन्होंने काछल को वरदान दे दिया की देवी आपके दो पुत्र होगें जो बहुत बलशाली होंगे और काछल वरदान लेकर चली गई जब बाछल गोरखनाथ की कुटिया पर पहुच तो उसे सब बातो का पता चला और उन्होने बतायाकि गुरूदेव इतने दिन तक तो मैने आपकी सेवा की मुझे कुछ नही दीया आपने तब गुरू गोरखनाथ ने माता बाछल को आशीर्वाद दिया की तुम्हारे एक लङका होगा और वह उन दोनो से ज्यादा बलशाली और देवीय शक्ति का धनी होगा इस प्रकार गोगा जी महाराज का जन्म हुआ





गोगा जी महाराज की शादी कथा :- 

गोगा जी महाराज की शादी धुपा नगरी के राजा संज्या की पुत्री सुर्यल के साथ हुई थी

जोड़ा कि राड़ कथा :-

एक बार राणी सुर्यल ने अपनी सासु मां जी से आज्ञा लेकर बाग जो की गोगा जी महाराज के मौसेरे भाईयो अर्जुन और सुर्जन का था मे घुमने के लिए चली गई वहा पर अर्जुन और सुर्जन ने सुर्यल का अपमान किया इस कारण वो आकर गोगा जी महाराज से कहने लगी की अर्जुन और सुर्जन ने मेरा अपमान किया है तो ईतनी बात सुनते ही गोगा जी महाराज को क्रोध आ गया और उन दोनो भाईयो से युद्ध करने के लिए चल पड़े और उनसे भिषण युद्ध किया तथा उस युद्ध में अर्जुन और सुर्जन की हार हुई

गोगा जी महाराज की समाधी कहा है:-

 गोगा जी महाराज ने हनुमानगढ के गोगामेङी स्थान पर जीवित समाधी ली आज भी उनके समाधि स्थल और जन्म स्थल पर मेला लगता है एव दुर दुर से लोग उनके समाधी स्थल पर माथा टेकने आते है किसी को अगर सर्प ने काट लिया है तो अगर वह गोगा महाराज की मेङी के उपर चला जाता है तो वो ठीक हो जाता हैं


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 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


ऋषियों ने समझ लिया कि इस मेंढकी  ने हमे बचाने के लिए अपने प्राण त्याग दिए उन्होंने मंदोदरी को वापस जीवन दान दिया और एक कन्या का रूप दिया तब से कहा जाता हैं की मंदोदरी सप्तऋषियों की संतान थी


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