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Chetavani Bhajan lyrics/ भजन चार प्रश्नों का लिरिक्स

भजन चार प्रशनो का लिरिक्स

Chetavani Bhajan lyrics
Chetavani bhajan lyrics


भजन


 सत्य नाम ईश्वर का सजनो
पारब्रम कहलाते है
हरी की महिमा आगे सजनो
 सब नर शीश झुकाते हैं




दशरथ सुत श्री राम चन्द्र जी
विश्वामित्र के साथ गए
रक्षा किनी विश्वामित्र की
सिया स्वयंबर देखन गए
रावण बाणासुर से योद्धा
धनुष के आगे हार गए
गुरु की आज्ञा पाकर के
प्रभु धनुष के दो टूक किए
दशरथ जी तो जनकपुरी में
बारात सज़ा कर आते है
हरी की महिमा आगे......





हिरनाकुश प्रलाद भक्त को
नष्ट करने को तैयार हुए
बांध पोट पर्वत से पटका
प्रभु ने अपने हाथ लिए
गोदी में ले दुष्ट होलिका
अग्नि में स्नान किया
प्रहलाद भक्त बच गए अग्नि से
होली जलाकर राख किया
खंभ गर्म करवाया राजा ने
कीडी चलती दिखलाते है
हरी की महिमा...............






नरसी जी जब नानी बाई का
नगर अंजार में ब्याह किया
निर्धन हो गया नरसी भक्त जब
हरनंदनी का ब्याह किया
व्याकुल होकर नानी बाई ने
श्याम प्रभु को याद किया
अपने भक्त की लाज बचाने
रूप सेठ का धार लिया
कंचन मेघ बरसाया प्रभु ने
किच नहीं दिखलाते है
हरी की महिमा...............





पांचों पांडव द्रुपद सुता को
जुए में जब हार गए
मौका पाकर दुष्ट दुशासन
नगन करन को त्यार हुए
भरी सभा योद्धा की बैठी
नीचा शीश झुकाय रहे
न्याय ना किना उस अबला का
सोच सोच पछताय रहे
भक्त कहे भगवान से वो
न्याय नहीं कर पाते है
हरी की महिमा.................




नमस्कार दोस्तों हमारे ब्लॉग पर आप सभी का स्वागत है में इस ब्लॉग पर पुरानी कथा और भजन लिरिक्स के पोस्ट लाता रहता हूं तो आप हमसे जुड़े रहे और हमारे ब्लॉग को फॉलो करें अगर ये पोस्ट अच्छी लगी तो इसे लाईक और शेयर करें इस पोस्ट को पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद

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