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Balaji bhajan lyrics/ बालाजी भजन लिरिक्स


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भजन


झालर संख नगरा बाजे रे
सालासर के मन्दिर में
हनुमान बिराजे रे



भारत राजस्थान में जी
सालासर एक धाम
सूरज सामो बनयो देवरों
बालाजी जी को धाम
जाके लाल धजा
लहरावे रे
सालासर के मन्दिर में
हनुमान बिराजे रे
झालर संख नगरा बाजे रे
सालासर के मन्दिर में
हनुमान बिराजे रे



नरेला की गिनती कोनी
सवर्ण छत्र हजार
दूर देश से आवे जात्री
बोले जय जय कार
सारा जय जय कार लगावे रे
सालासर का मंदिर में
हनुमान बिराजे रे
झालर संख नगरा बाजे रेे
सालासर का मंदिर में
हनुमान बिराजे रे





चैत्र सुदी पूनम को मेलो
भीड़ लगे अती भारी
बाबा थारा दर्शन करने
आव है नर नारी
ब तो जात जदुल्या ल्याव रे
सालासर का मंदिर में
हनुमान बिराजे रे
झालर संख नगरा बाजे रे
सालासर के मन्दिर में
हनुमान बिराजे रे



राम दूत अंजनी सुत का
धरो हमेशा ध्यान
चैन सिंह चरना रो चाकर
लाज रखे हनुमान
बाबो बेड़ा पार लगावे रे
सालासर का मंदिर में
हनुमान बिराजे रे
झालर संख नगरा बाजे रे
सालासर का मंदिर में
हनुमान बिराजे रे






नमस्कार दोस्तों हमारे ब्लॉग पर आप सभी का स्वागत है में इस ब्लॉग पर पुरानी कथा और भजन लिरिक्स के पोस्ट लाता रहता हूं तो आप हमसे जुड़े रहे और हमारे ब्लॉग को फॉलो करें  Balaji bhajan lyrics की ये पोस्ट अच्छी लगी तो इसे लाईक और शेयर करें पोस्ट पढ़ने के लिए आपका धन्यवाद




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मंदोदरी कोन थी :- पुरानी कथाओं के अनुसार बताते है की मंदोदरी एक मेंढकी थी एक समय बात है ! 

सप्तऋषि खीर बना रहे थे उस खीर में एक सर्प गिर गया ये सब मंदोदरी ने देख लिया


 ऋषियों ने नहीं देखा तो मंदोदरी जो कि एक मेंढकी थी वो ऋषियों के देखते देखते उनके खाने से पहले उनकी खीर बना रहे पात्र में गिर गई 


ऋषियों ने ये सब देख लिया तो अब जिस भोजन में अगर मेंढक गिर जाए उसे कोन खाए 


इसलिए उन्होंने उस खीर को फेक दिया जैसे ही उन्होंने खीर को फैका उसमे से मेंढकी के साथ एक सर्प भी निकला 


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