Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2019

कर्ण को कवच क्यो और कैसे मिला नर नारायण की संपूर्ण कथा

कर्ण को कवच क्यो और कैसे मिला
नमस्कार दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम बात करेंगे कि कर्ण को कवच क्यो और कैसे मिला दोस्तो इस कथा को समझने से पहले हमे नर नारायण की कथा को समझना जरूरी है


नर नारायण की कथा:- त्रेता युग में एक दंबोधव नाम का राक्षस था उसने भगवान सूर्य की कई वर्षों तक तपस्या की भगवान सूर्य उनसे प्रसन्न होकर उसे वरदान मांगने को कहा दंबोधव ने कहा हे सूर्य देव मुझे अमरता का वरदान दो

सूर्य देव ने कहा हे पुत्र ऐसा नहीं हो सकता है क्योंकि जो जन्म लेता है उसे मरना ही पड़ता हैं
तब दंबोधव ने बड़ी चतुराई से कहा ठीक है प्रभु मुझे एक हजार ऐसे दिव्य कवच दीजिए जिनमें हर एक कवच को वो ही तोड़े जो एक हजार वर्षों तक तपस्या करे और उस कवच को तोड़ने के बाद तुरंत ही वो मर जाए सूर्य देव ने उसे ये वरदान मजबूर होकर देना पड़ा क्योंकि सूर्य देव को पता था की ये वरदान भी अमरता से कम नहीं है

अब दंबोधव वरदान प्राप्त करने के बाद पूरे संसार में उत्पात मचाने लगा पूरे संसार में हाहाकार मच गया जल्द ही वह सहस्त्र कवच के नाम से जाना जाने लगा

दूसरी तरफ राजा दक्ष की पुत्री मूर्ति का विवाह बर्मा के पुत्र धर्म के साथ ह…

Bhajan lyrics, चार सखी मिल पेड़ के नीचे भजन लिखित में,

भजन - चार सखी मिल पेड़ के नीचे
तर्ज- हरयाणवी
 चार सखी मिल पेड़ के नीचे आपस में बतलाए रही
 इन चारो में कोन बड़ी मेरे नहीं समझ में आय रही

 माया बोली में में बड़ी कर देती साहू कारी
जिस घर में मेरा बासा हो वहा भरी रहे अलमारी
कच्छे का में पक्का कर दू कर दू महल अटारी
घूमने फिरन और शहल करन ने लादू मोटर लारी
या दुनिया मन चाव स म किसी किसी में आय रही
इन चारो...............


किस्मत बोली में बड़ी क कर देती बेड़ा पार
गरीब आदमी निर्धन का में भरदेती भण्डार
कच्चे का में पक्का कर दू ले कोई मेरा एकतार
पांच सौ के करने हो तो कर दू पांच हजार
या दुनिया मन चाव स म किसी किसी ने चाय रही
इन चारो...…...........

अक्ल बोली में बड़ी अक्ल से काम चलाले
लाल पड़ी है रेत बीच बिन अक्ल कोन उठाले
मुंजी मरे माल की खातिर बिना अक्ल कुन पाले
बिना अक्ल का सुनल्यो सजनो मुर्ख मुंड फूटाले
या दुनिया मन चाव स म किसी किसी ने चाय रही
इन चारो.................

 होनी बोली में बड़ी दयू पग में मार कुल्हड़ा
जिस के सर पर में बैठू वहा तुरंत मचा दू अखाड़ा
बुला लीजिए वेध डॉक्टर चले ना जादू झाड़ा
धनपत सिंह कहे पेट की खातिर भरता डोले भाड़ा
इन चारो में होनी बड़ी है या पं…

CAA क्या है ?

CAA क्या है
नमस्कार दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम बात करेंगे कि भारत सरकार द्वारा लागू किया गया कानून CAA क्या है, CAA क्यो लागू किया गया, CAA में क्या कमी है, CAA का विरोध क्यों हो रहा है, CAA में कोनसे कोनसे धर्म शामिल किए गए हैं आदि बातो पर पूरे विस्तार से समझेंगे


CAA और CAB में क्या अंतर है CAA की फुल फॉर्म नागरिकता संशोधन कानून ( Citizenship Amendment Act ) है ये संसद में पास होने से पहले CAB ( Citizenship Amendment Bill) था जो कि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से एक कानून बन गया


CAA क्या है  CAA ( Citizenship Amendment Act) एक ऐसा कानून है जिससे कि भारत के तीन पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान अल्पसंख्यक लोगो जो की भारत में कई बरसों से रह रहे है उनको नागरिकता मिल सकती हैं इस कानून (Act) के तहत


CAA को क्यो लागू किया गया CAA ( Citizenship Amendment Act) को इसलिए लागू किया गया है कि भारत के तीन पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से अनेक शरणार्थी भारत में कई सालो से सरण ले रखी है और उन्हें कोई अधिकार नहीं है इससे उन्हें भारत की नागरिकता छ व…

रक्षाबंधन कब से शुरू हुआ सम्पूर्ण जानकारी

रक्षा बंधन क्यो मनाया जाता हैरक्षाबंधन मानना कब से शुरू हुआ रक्षाबंधन क्यो मनाया जाता हैं रक्षा बंधन कब मनाया जाता हैं

नमस्कार दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि रक्षा बंधन क्यो मनाया जाता है और रक्षा बंधन कब से शुरू हुआ और रक्षा बंधन कब मनाया जाता है और रक्षा बंधन कैसे मनाया जाता है तो आप बने रहे हमारे ब्लॉग के साथ

1. रक्षा बंधन कब से शुरू हुआ :-    पुराणों के अनुसार रक्षा बंधन पर बहू चर्चित एक कहानी है कि जब धरती पर सतयुग था उस वक़्त राजा बलि नाम के असुर राजा थे आपको इनकी ज्यादा पहचान कराने की कोशिश करता हूं कि जो बानासुर जिससे कि रावण की भेट हुई थी सीता जी के स्वयंवर में उन्हीं बाणासुर के पिता थे राजा बलि उनका राज था पूरी प्रथ्वी पे ।
 वो राक्षसी वंस के थे मगर बड़े ही धर्मात्मा राजा थे उन्होंने 100 यज्ञ करने का विचार आया और यज्ञ शुरू कर दिया जब उनके 99 यज्ञ सम्पूर्ण हो गए और जैसे ही 100वा यज्ञ आरम्भ किया देवताओं के राजा इन्द्र मन में भयभीत हो गया कि कहीं राजा बलि उनका सिंहसन ना छीन ले इसी कारण वो भगवान विष्णु को अपने दुख क कारण बताकर समाधान करने की वि…

राम भक्त शबरी के माता पिता का क्या नाम था

सबरी के माता का नाम क्या था
सबरी के पिता का नाम क्या था
भीलनी के माता का नाम क्या था
भीलनी के पिता का नाम क्या था
भीलनी कोन थी
भीलनी का पिछला जन्म कोन सा था




नमस्कार दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम बात करेंगे की भीलनी कोन थी और भीलनी के माता पिता का क्या नाम था तथा भगवान श्री राम ने भीलनी के हाथ से झूठे बेर क्यो खाए

तो दोस्तों चलिए शुरू करते है





भीलनी कोन थी:-

         भीलनी एक भील जनजाति में जन्मी  उसका नाम सबरी था वह बकरियां चराती थी जब वह उंसने देखा कि उनके माता पिता और परिवार के अन्य लोग जब जानवरो को पकड़ पकड़ के एकत्र कर रहे है तो भीलनी ने पूछा कि पिताजी आप इन जानवरो का क्या करेंगे उसने जवाब दिया कि बेेेटी इन जानवरों से तुम्हारी शादी में आए हुए बारातियों को भोजन खिलाएंगे ये सुनकर भीलनी की बहुत दुख हुआ उसने आदि रात के समय सभि जानवरो को आजाद कर दिया और खुद भी घर से भाग गई और भगवान के भजन करने लगी और उनकी भक्ति में लीन हो गई


भगवान श्री राम से भीलनी की भेट:-
  वानवाश काल के दौरान जब भगवान श्री राम जब पंचवटी में कुछ दिनों के लिए विश्राम कर रहे थे तभी वहां से माता सीता का हरण हो जाने के पश्चात भगवान…